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परंतु श्वेत लोगों को जानना चाहिए कि लाल लोगों के लिए यह महान आत्मा वकान-टांका की इच्छा थी कि एक पशु स्वयं को दो पैरों वाला मनुष्य बनाए, ताकि वह परम पवित्र पाइप उनके लोगों तक पहुँचा सके; और हमें यह भी सिखाया गया था कि हमारा पवित्र पाइप लाने वाली यह श्वेत भैंस-गाय महिला इस ‘संसार’ के अंत में फिर प्रकट होंगी—और हम भारतीय जानते हैं कि उनका आगमन अब अधिक दूर नहीं है।”
आज, 27 सितंबर, “एकता के माध्यम से शांति के 99 दिन” पहल का अंतिम दिन है, जिसे इहांक्टोनवान डकोटा और चिकसॉ प्रथम-राष्ट्रों के माननीय मुखिया फिल लेन जूनियर (वीगन) ने 21 जून, 2026 को आरंभ किया था। ऐसे वैश्विक प्रयासों से, हम इस आयोजन के संदेश —“शांति चुनें शांति से जिएँ। युद्ध समाप्त करें”को साकार करने के और निकट पहुँच रहे हैं।स्थायी शांति कैसे हासिल की जाए? ओग्लाला लकोटा (सू) प्रथम राष्ट्र के महान दूरदर्शी और पवित्र चिकित्सक ब्लैक एल्क ने “त्रिस्तरीय” शांति की चर्चा की थी।“पहली शांति, जो सबसे महत्वपूर्ण है, वह मनुष्यों की आत्माओं में तब आती है, जब वे ब्रह्मांड और उसकी समस्त शक्तियों से अपने संबंध और एकत्व को समझते हैं, और यह जान लेते हैं कि ब्रह्मांड के केंद्र में वाकान-टांका का वास है तथा यह केंद्र वास्तव में हर जगह, हममें से प्रत्येक के भीतर है। यही वास्तविक शांति है, और अन्य सभी केवल इसका प्रतिबिंब हैं। दूसरी शांति दो व्यक्तियों के बीच स्थापित होती है। और तीसरी वह है जो दो राष्ट्रों के बीच स्थापित होती है। लेकिन सबसे बढ़कर आपको यह समझना चाहिए कि राष्ट्रों के बीच तब तक शांति नहीं हो सकती, जब तक उस सच्ची शांति को न जाना जाए, जो, जैसा मैं अक्सर कहता हूँ, वह मनुष्यों की आत्माओं के भीतर है।”अपने जीवन में, आठ दशकों से अधिक लंबे जीवन में ब्लैक एल्क को अपने जीवन और उद्देश्य, अपने लोगों के जीवन तथा पूरे संसार से संबंधित अनेक आध्यात्मिक दिव्य-दर्शनो हुए।नौ वर्ष की आयु में, वे अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़े और 12 दिनों तक अचेत रहे। इस दौरान, उन्हें एक प्रबल दिव्य-दर्शन हुआ, जिसमें वे छह पितामहों से मिले, जिन्होंने उन्हें पवित्र शिक्षाएँ दीं। विशेष रूप से, चौथे पितामह ने उन्हें दो मार्ग दिखाए, एक लाल और एक काला।“[…] उन्होंने फिर कहा, ‘पृथ्वी को देखो!’ तब मैंने नीचे देखा और वह दूर लोगों के एक वलय जैसी दिखाई दी, उसके केंद्र में वृक्ष बनी पवित्र छड़ी खिल रही थी और जहाँ वह खड़ी थी, वहाँ दो मार्ग, एक लाल और एक काला, एक-दूसरे को काट रहे थे। पितामह ने कहा, ‘जहाँ दैत्य रहता है (उत्तर), वहाँ से उस दिशा तक, जिसकी ओर तुम सदा मुँह करते हो (दक्षिण), लाल मार्ग जाता है, भलाई का मार्ग, और तुम्हारा राष्ट्र इसी पर चलेगा। काला मार्ग वहाँ से जाता है, जहाँ गर्जना करने वाले प्राणीओ रहते हैं (पश्चिम), उस ओर जहाँ सूर्य निरंतर चमकता है (पूर्व), यह भयावह मार्ग है, संकट और युद्ध का मार्ग। तुम्हें इस पर भी चलना होगा और इससे तुम्हें अपने लोगों के शत्रुओं का नाश करने की शक्ति मिलेगी। चार आरोहणों में तुम शक्ति के साथ पृथ्वी पर चलोगे।’”उत्तर से दक्षिण तक जाने वाला शुभ लाल मार्ग आध्यात्मिक मार्ग है। लकोटा प्रथम-राष्ट्र-बुज़ुर्गों के अनुसार, नकारात्मक शक्ति बाईं ओर और सकारात्मक शक्ति दाईं ओर होती है। हम कभी बाएँ या दाएँ जा सकते हैं, लेकिन हमें हमेशा मध्य में लौटकर आध्यात्मिक संतुलन के प्रतीक “शुभ लाल मार्ग” पर चलना चाहिए। इस दृढ़ती ने ब्लैक एल्क को सिखाया कि उनका उद्देश्य अपने लोगों को भलाई के मार्ग, लाल मार्ग पर ले जाना था।ब्लैक एल्क को एक और महत्वपूर्ण दिव्य-दर्शन 1890 में हुआ, जब उन्होंने प्रेत-नृत्य में भाग लिया। उस समय इस अनुष्ठान में भाग लेने वाले कई लोगों ने बताया कि उन्हें मसीहा-सदृश व्यक्तित्व या महान आत्मा के पुत्र का वही दिव्य-दर्शन हुआ, जिन्हें वानेकिया कहा जाता है। वानेकिया लकोटा (सू) प्रथम-राष्ट्र का शब्द है, जिसका अर्थ है “जीवन देने वाला।” नृत्य करते समय ब्लैक एल्क ने अनुभव किया कि उनकी आत्मा शरीर से बाहर निकल गई।“और जैसे ही मैंने भूमि को छुआ, बारह पुरुष मेरी ओर आए और बोले, ‘तुम हमारे पिता, दो पैरों वाले मुखिया को देखोगे!’ फिर वे मुझे वृत्त के केंद्र में ले गए, जहाँ मैंने फिर उस पवित्र वृक्ष को देखा, जो पत्तों से भरा और खिला हुआ था। पर मैंने केवल इतना ही नहीं देखा। वृक्ष के सामने एक व्यक्ति था दोनों बाँहें फैलाए उसके सामने खड़ा हुआ। मैंने उसे ध्यान से देखा, लेकिन समझ नहीं पाया कि वह किस समुदाय से था। वह वसीचू [श्वेत व्यक्ति] नहीं था और न ही इंडियन। उसके बाल लंबे और खुले थे, तथा सिर के बाईं ओर उसने गरुड़ का पिच्छ लगाया हुआ था। उसका शरीर सुदृढ़ और सुंदर था तथा उस पर लाल रंग लगा था। मैंने उसे पहचानने का प्रयास किया, लेकिन पहचान नहीं सका। वह अत्यंत सुंदर व्यक्ति था। जब मैं उसे ध्यान से देख रहा था, उसका शरीर बदलने लगा और प्रकाश के सभी रंगों से अत्यंत सुंदर हो गया, उसके चारों ओर प्रकाश था। उसने गाते हुए कहा, ‘मेरा जीवन ऐसा है कि पृथ्वी के सभी प्राणीओ और उगने वाली सभी वस्तुएँ मेरी हैं। तुम्हारे पिता, महान आत्मा ने ऐसा कहा है। तुम्हें भी यही कहना होगा।’ फिर वह हवा में बुझते दीपक की तरह विलीन हो गया। वहाँ उपस्थित बारह पुरुष बोले, ‘उन्हें देखो! तुम्हारे राष्ट्र का जीवन ऐसा ही होगा!’ मैंने फिर देखा कि दिन कितना सुंदर था - हरी होती धरती के ऊपर आकाश पूरा नीला और पीले प्रकाश से भरा था। और मैंने देखा कि सभी लोग सुंदर और युवा थे। वहाँ न कोई वृद्ध था, न कोई बच्चा- केवल लगभग एक ही आयु के, सुंदर लोग थे। फिर बारह महिलाएँ मेरे सामने खड़ी हुईं और बोलीं, ‘उन्हें देखो! तुम उनके जीवन का यह ढंग पृथ्वी पर वापस ले जाओगे।’”रोचक बात यह है कि ब्लैक एल्क के घनिष्ठ मित्र स्टैंडिंग बेयर द्वारा इस दिव्य-दर्शन के साथ बनाए गए चित्र में वानेकिया को भैंस की खाल का चोगा पहने दिखाया गया, मानो यह संकेत हो कि वे श्वेत भैंस महिला का पुनरागमन हैं।ब्लैक एल्क के दिव्य-दर्शन में लंबे बालों और श्वेत गरुड़ का पंख धारण करने वाला उद्धारकर्ता, न तो पश्चिमी व्यक्ति है, न ही प्रथम राष्ट्र का व्यक्ति। यह वर्णन हमें उस श्वेत भैंस महिला की याद दिलाता है, जो 2024 में हमारे सुप्रीम मास्टर चिंग हाई अंतरराष्ट्रीय संगठन के एक सदस्य (सभी वीगन) के दिव्य-दर्शन में प्रकट हुई थीं।हाल में संसार को बचाने का कार्य बहुत कठिन रहा है, जिससे मैं निराश हो गयी थी। एक दिन, जब मैं दुख में ध्यान कर रही थी, तभी मास्टर (सुप्रीम मास्टर चिंग हाई) एक वृद्ध मूल अमेरिकी महिला के रूप में प्रकट हुएं। उन्होंने बहुत चौड़ा और लंबा श्वेत चोगा पहना था और उनके माथे पर कुछ झुर्रियाँ थीं। वे लगभग 60 वर्ष की मानवीय महिला जैसी दिख रही थीं। उसके माथे पर तीन रंग का हेडबैंड बंधा हुआ था, उनके हेडबैंड पर एक लंबा श्वेत पंख लगा था, और गले में कई प्राचीन गहरे लाल मनकों वाला पारंपरिक हार था। […]हम गरुड़-लोगों की तरह उड़े और मैंने अपने माथे पर काले गरुड़ के पिच्छ देखे। कुछ देर उड़ने के बाद, हम एक डोंगी पर उतरे। मास्टर और मैं, एक-एक छोर पर बैठे। डोंगी दो लोगों के बैठने लायक बड़ी थी। चेहरे पर सौम्य भाव लिए, मास्टर ने मुझसे बात की और मेरे हृदय की कई गाँठें खोल दीं।फिर मास्टर खड़े हुएं, और उनका श्वेत चोगा सुंदर ढंग से भूमि पर लटक रहा था। उन्होंने दूर सूर्य की ओर देखा। वह भौतिक सूर्य नहीं था; वह अत्यंत उज्ज्वल था! उसका चकाचौंध कर देने वाला श्वेत प्रकाश मेरी प्रज्ञा-नेत्र में चमका। भीतर के मास्टर ने कहा, “तुम उन्हें बता सकते हो: मैं श्वेत भैंस देवी हूँ।” मैंने घुटने टेककर कहा, “जी।”यद्यपि ये दोनों दिव्य-दर्शनों 130 वर्षों के अंतराल में दो अलग-अलग व्यक्तियों को हुए, फिर भी इनमें वही पवित्र स्वरूप—श्वेत भैंस महिला के रूप में लौटे सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन)—दिखाई देते हैं, जो परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह भी हैं।वास्तव में, ब्लैक एल्क लेखक जॉन नेहार्ट को अपने दिव्य-दर्शन के वानेकिया का वर्णन करते समय ने कहा था,“ऐसा लगा मानो उनके हाथों की हथेलियों पर घाव थे […] इस पर विचार करने के बाद मुझे लगता है कि मैंने स्वयं महान आत्मा के पुत्र को देखा था।”यद्यपि हमारे लिए इस दावे की पुष्टि करना कठिन है, लेकिन हम जानते हैं कि ब्लैक एल्क की आध्यात्मिक यात्रा प्रथम-राष्ट्र के पवित्र चिकित्सक बनने पर समाप्त नहीं हुई। 1904 में, लगभग 41 वर्ष की आयु में, उन्होंने बपतिस्मा लिया और “निकोलस” नाम अपनाया। शेष जीवन उन्होंने अपने समुदाय में एक गैर-पादरी कैथोलिक धर्मशिक्षक के रूप में सेवा की।मेरा मानना है कि, ब्लैक एल्क ने उथल-पुथल भरे समय में इन दो विरोधी संस्कृतियों के बीच की दूरी मिटाने की पूरी कोशिश की। इन दोनों संस्कृतियों का टकराव आवश्यक नहीं है। मुझे लगता है कि हम ऐसे मोड़ पर हैं, जहाँ ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे की विरोधी रही दो समुदायों के बीच सच्ची बहाली संभव है।ब्लैक एल्क के दिव्य-दर्शन का पवित्र वलय और पुष्पित वृक्ष, यानी पवित्र लाल मार्ग का वह अंत जहाँ लोग पहुँचते हैं, प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के अंत के दिव्य-दर्शन जैसा है, जहाँ पूर्णता आती है; या प्रेत नर्तक के संदर्भ में, पहले से विद्यमान सामंजस्य फिर स्थापित होता है।ब्लैक एल्क के जीवन और विरासत के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें rapidcitydiocese.org/docmentary-nbeब्लैक एल्क स्वयं अपने दिव्य-दर्शन और परस्पर विरोधी प्रतीत होने वाले विश्वासों की व्याख्या कैसे करते? शायद, “द सेक्रेड पाइप: ब्लैक एल्क्स अकाउंट ऑफ द सेवन राइट्स ऑफ द ओग्लाला सू” पुस्तक में दर्ज उनके कथन से हमें उनके विचारों की झलक मिल सकती है।“श्वेत लोगों ने, या कम से कम ईसाइयों ने, हमें बताया है कि परमेश्वर ने मनुष्यों के पास अपने पुत्र को भेजा, जो पृथ्वी पर व्यवस्था और शांति पुनः स्थापित करेंगे; और हमें बताया गया है कि यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था, लेकिन अंतिम न्याय के समय, इस संसार या चक्र के अंत में, वे फिर आएँगे। मैं इसे समझता हूँ और जानता हूँ कि यह सत्य है, पर श्वेत लोगों को यह भी जानना चाहिए कि लाल लोगों के लिए भी वाकान-टांका, महान आत्मा की यही इच्छा थी कि पशु दो पैरों वाले व्यक्ति में बदलकर उनके लोगों के पास परम पवित्र पाइप लाए; और हमें भी सिखाया गया था कि हमारी पवित्र पाइप लाने वाली यह श्वेत भैंस गौ महिला इस ‘संसार’ के अंत में फिर प्रकट होंगी- और हम इंडियन जानते हैं कि उनका आगमन अब अधिक दूर नहीं है।”यह कथन दर्शाता है कि ब्लैक एल्क बहुत पहले समझ चुके थे कि उनके दिव्य-दर्शन के वानेकिया ईसाई और प्रथम-राष्ट्र की पारंपरिक मान्यता, दोनों में भविष्यवाणी किए गए पवित्र अस्तित्व का पुनरागमन हैं; और आराध्य प्रभु यीशु मसीह तथा श्वेत भैंस महिला एक ही हैं।अपने जीवन में दोनों मान्यताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करके उन्होंने दोनों पक्षों के लोगों को परस्पर सद्भाव से रहना और साथ ही महान आत्मा या परमेश्वर की समझ गहरी करना सिखाया।“हमें अच्छी तरह समझना चाहिए कि सभी वस्तुएँ महान आत्मा की रचनाएँ हैं। हमें जानना चाहिए कि वे हर वस्तु में विद्यमान हैं: वृक्षों, घास, नदियों, पर्वतों, चार पैरों वाले सभी पशुओं और पंखधारी जीवों में; और इससे भी महत्वपूर्ण हमे यह समझना है कि वे इन सभी वस्तुओं और जीवों से ऊपर भी हैं। जब हम यह सब अपने हृदय की गहराई में समझ लेंगे, तब हम महान आत्मा के प्रति श्रद्धा रखेंगे, उनसे प्रेम करेंगे और उन्हें जानेंगे; और फिर हम उनकी इच्छा के अनुरूप होंगे, आचरण करेंगे और जीवन जिएँगे।”आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जब ब्लैक एल्क का दिव्य-दर्शन सत्य हो चुका है — लंबे समय से प्रतीक्षित हस्ती सुप्रीम मास्टर चिंग हाई के रूप में हमारे बीच हैं, जिन्होंने सभी धर्मों को जोड़ने और लोगों को अपनी आत्मा में शांति स्थापित करना सिखाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।सभी अच्छे धर्मों का वास्तविक सार एक ही परमेश्वर की ओर इशारा करता है। मेरा अर्थ है, वह वास्तविक शिक्षा। तो, एक प्रकार से, हर धर्म ताओवाद है, हर धर्म बौद्ध धर्म या ईसाई धर्म है। बुद्ध के देहावसान के बाद उनके अनुयायियों ने स्वयं को “बौद्ध” कहा। मसीह के देहावसान के बाद उनके अनुयायियों ने स्वयं को “ईसाईयों” कहा। वह मार्ग सिखाने वाले मास्टर के देहावसान के बाद उनके अनुयायियों ने स्वयं को “मार्गवादी” या “ताओवादी” कहा। आप यह देख सकते हैं। चूँकि हम सब एक हैं, अतः हमें शब्दावलीयों पर बहस करने की आवश्यकता नहीं।सृष्टिकर्ता केवल एक हैं, और यह हम सभी जानते हैं। लेकिन एक सार भी है। सभी धर्मों का सार धर्मग्रंथों में नहीं लिखा गया है, क्योंकि मानव भाषा में परमेश्वर को लिखना संभव नहीं है, सिवाय उनके नाम—प-र-मे-श्व-र—के। और वास्तविक सार को केवल हमारी आत्मा ही जान सकती है। इसीलिए हमे आत्मा से आत्मा तक वाले संचरणन की ज़रूरत है।2017 में, साउथ डकोटा के रैपिड सिटी धर्मप्रांत ने आधिकारिक रूप से ब्लैक एल्क को संत घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ की। ब्लैक एल्क के लिए शायद इससे कोई अंतर न पड़े कि उन्हें संत कहा जाता है या नहीं, लेकिन जिस दिन हम सांस्कृतिक या धार्मिक विभाजनों से परे देखकर एक-दूसरे में संतत्व पहचान सकेंगे, संभवतः उसी दिन एक समुदाय के रूप में हम बहाल होना आरंभ करेंगे। उस समय पर, जीवन का पवित्र वृक्ष पत्तों उगाने और खिलना शुरू करेगा!










